Raksha Bandhan Essay in Hindi For Students

raksha bandhan essay in hindi

 raksha bandhan essay in hindi – रक्षा बंधन पर हिंदी निबंध 

आज के इस लेख में हम सीखेंगे क्षाबंधन पर हिंदी निबंध 2021 जो परीक्षा की दृष्टिकोण से अत्यंत लाभप्रद और सहायक सिद्ध होने वाली है |इस लेख के अंतर्गत आपकी आवश्यकताओं और सवालो को भी ध्यान में रखा गया है | आशा करता हूँ के आज का यह निबंध आपको पसंद आएगा तो चलिए चलते है बिना समय गवाँये आज के इस निबंध की ओर- 

रक्षा बंधन पर हिंदी निबंध 

प्रस्तावना –

रक्षाबंधन हिन्दुओ का महत्वपूर्ण त्योहार है | यह संपूर्ण  भारत में श्रावण मास ( सावन ) की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है | रक्षाबंधन भाई – बहन के अकल्पनीय प्रेम का प्रतीक माना जाता है |  भारतीय पंचांग के आधार पर यह पर्व श्रावण ( सावन ) के महीने में मनाये जाने के कारण इस पर्व को श्रावणी (सावनी ) अथवा सलूनो भी कहा जाता है |

रक्षाबंधन के इस पर्व में भारत देश की प्रत्येक स्त्री अपने भाई के हाथ पर एक धागानुमा राखी बाँधती है और फिर भाई अपनी बहन को आशीर्वाद देकर उसकी सुरक्षा और रक्षा का वायदा करते है बहन को आशीर्वाद देने के साथ उसे उपहार के रूप में अपनी सामर्थ्य के अनुसार कुछ चीज़ें भेंट भी करते है | राखी के इस पवित्र पर्व को मनाने के लिए सभी भाई अपने बहनो के आगंतुक स्थानों की यात्रा करते है |

raksha bandhan essay in hindi

 raksha bandhan essay in hindi – रक्षा बंधन पर हिंदी निबंध 

भारत में इस पर्व को प्राचीन समय से ही बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है | भारत में रक्षाबंधन के इस पर्व के दिन सभी बहने अत्यधिक प्रसन्न और उत्साहित रहती है | रक्षाबंधन भाई – बहनो के प्रेम का प्रसिद्ध त्योहार माना जाता है | रक्षा बंधन के इस पर्व के दिन सभी बहने अपने भाइयो की खुशहाली तथा सफलताओं के लिए भगवान् से प्रार्थना करती है |

रक्षा बंधन का महत्व –

 रक्षाबंधन भाई – बहन के प्रेम का प्रतीक माना जाता है | रक्षाबंधन का पर्व हम सभी लोगो के बीच भाईचारगी और अपनत्व को बढ़ावा देता है | रक्षाबंधन के पर्व के दिन सभी बहने अपने भाइयों के लिए भगवान् से प्रार्थना करती है | भारत में प्राचीन काल से ही इस पर्व को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है |

यह सम्पूर्ण भारत में सावन माह में पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है जो भाई – बहन के प्रगाढ़  प्रेम का एक बड़ा सूचक माना जाता है | यह प्रसिद्ध त्योहार दुनिया के लिए एक धरोहर की तरह है जो भाई – बहन के पवित्र रिश्ते को और ज्यादह प्रगाढ करने का सराहनीये कार्य करती है |

यह पर्व लोगो में शांति और प्रेम का संवाद पहुँचाने का भी कार्य करती है | आज आधुनिक दुनिया में जहाँ  लोगो में नफरत और क्लेश की भावना बढ़ती जा रही है , परिवार में अशांति और दुःख का वातावरण फैला हुआ वही रक्षाबंधन के इस पर्व से लोगो और समाज के अंदर फैली नफरत और क्लेश को कम करने का एक सुनहरा अवसर भी प्राप्त होता है |

धार्मिक दृष्टिकोण के आधार पर रक्षाबंधन के इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाता है | लोगो में ऐसी मान्यता है की प्राचीन समय में देव और दानवों के बिच भयंकर युद्ध हुयी जिसमे दानवो ने अपनी क्रूरता से देवो को पराजित करते जा रहे थे | तभी भगवान् इंद्र बृहस्पति की यात्रा की और अपनी साडी समस्या सुनाई तभी कोने में छिपकर उनकी पत्नी इन्द्राणी इस वार्तालाप को सुन रही थी तब उसने अपने पति के हाथ में एक धागे का डोर मंत्र से उज्वलित कर बाँध दिया |

भविष्य पुराणों के आधार पर बताया जाता है तब से देवो की विजय शुरू हो गयी और दानवो का अंत होने लगा | तब से लोगो में रक्षाबंधन के इस पर्व का महत्व काफी लोकप्रिय और श्रद्धपूर्ण  हो गया | लोगो में बहनो के द्वारा अपने हाथो पर इस पवित्र धागे को बांधकर इस श्रद्धा का पालन किया जाता है |

रक्षाबंधन विभिन्न उपनामो के रूप में – 

 रक्षाबंधन सम्पूर्ण भारत में किसी न किसी नाम तथा किसी न किसी रिवाज़ो के साथ बड़े ही हर्षोउल्लाश के साथ मनाया जाता है | महाराष्ट्र में इस पर्व को नारियल पूर्णिमा या श्रावणी के नाम से जाना जाता है | इस दिन सभी लोग आस – पास के नदी या समुन्द्र के तट पर जाकर जनेऊ बदलने के रिवाज को पूरा करते है तथा समुद्र के देवता वरुण की पूजा अर्चना में नारियल अर्पित करते है |

बताया जाता है इस पर्व के दौरान समुद्र के तट पर नारियल अत्यधिक मात्रा में इकठ्ठा हो जाता है | राजस्थान में रक्षाबंधन के इस पर्व को रामराखी या चूड़ाराखी के नाम से भी जाना जाता है |  यह राखी अन्य राखी से थोड़ा भिन्न होता है |  यहाँ राखियो में लाल धागे के साथ पिले रंग का एक फुँदना बाँधा जाता है |

भगवान् को बाँधने के लिए इन रखियो का प्रयोग किया  जाता है | तथा सायंकाल में गोबर , भष्मी का प्रयोग करते हुए लोग स्नान करते है | वही दूसरी और उत्तरप्रदेश में सावन मॉस के पूर्णिमा के दिन रक्षा बंधन के इस पर्व को बड़े ही धूमधाम के साथ  मनाया जाता है |

इस  पर्व के दौरान बहन अपना सारा प्यार अपने भाई के कलाई पर राखी बांधकर अर्पित कर देते है तथा भाई अपने बहन को आशीर्वाद प्रदान कर उन्हें सुरक्षा और मुसीबत के समय साथ देने का भी वचन देते है | दक्षिण भारत के विभिन्न् राज्यों – तमिलनाडु , केरल , मलयालम आदि राज्यों में ब्राह्मणों के द्वारा इस पर्व को अवनि अवित्तम के नाम से जाना जाता है |

यज्ञ के प्रति समर्पण भाव रखने वाले यज्ञोपवीतधारी ब्राह्मनो के लिए यह एक सुखद घड़ी होता है | इस पर्व के दौरान ये ब्राह्मण नदी या समुद्र केतट पर जाकर स्नान करते है और उसके उपरांत तर्पण कर नए यज्ञोत पिट धारण किया जाता है |

रक्षाबंधन के ऐतिहासिक पहलु –

 रक्षाबंधन का पर्व अत्यंत ही महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है | इस पर्व के मनाने के पीछे कई सारे प्रचलित किस्से है जो रक्षाबंधन के इस पर्व को अन्य पर्वो से अतयधिक महत्वपूर्ण बना देता है | बताया जाता है की  संसार पर विजय प्राप्त करने के उद्देश्य से युद्ध लड़ने वाला एक योद्धा सिकंदर को उसके एक हिन्दू दुश्मन से मारे जाने का षड़यंत्र का पता जब उसकी पत्नी को चला तब उसने तुरंत उस दुश्मन योद्धा के पास जाकर उसकी हाथ के कलाई में एक डोरे को बांधकर अपने पति के जीवन की रक्षा का वादा करवा लिया |

अंतया युद्ध के दौरान सिकंदर के बूरी तरह परास्त होने पर भी सिकंदर को  जीवन दान दे दिया | ऐसा माना जाता है की जब भारत के राजपूत योद्धा अपने रणभूमि के लिए प्रस्थान करते तो उनकी पत्निया माथे पर कुमकुम का टिका लगाकर हाँथो में कलाई पर रेशमी धागे बाँध दिया करती थी जिससे उन्हें युद्ध में विजय प्राप्त होता था और नए जीवन की तरफ उन्मुख करते थे |

एक और किस्से से पता चलता है के जब मेवाड़ की राजकुमारी कर्मावती पर बहादुरशाह ने आक्रमण कर दिया तब वह उससे युद्ध करने में असमर्थ और अक्षम थी तब उन्होंने अपने सल्तनत और लोगो की जान बचने के लिए मुग़ल वंश के बादशाह हुमायूँ को डोरे से बनी राखी भेजकर उनसे मदद की गुहार लगायी |

राखी के इस डोर का महत्व तब पता चलता है जब मुसलमान होते हुए भी मुग़ल बादशाह हुमायूँ ने अपनी सेना के साथ मेवाड़ की राजकुमारी कर्मावती के साम्राज्य की रक्षा ही नहीं बल्कि उनके जीवन की भी रक्षा की |

भारतीय इतिहास में अनेको कहानिया और किस्से मौजूद है जो राखी के इस पवित्र पर्व को जिवंत और महत्वपूर्ण बना देता है | राखी के इस डोर में वो अदम्य शक्ति और साहस छिपा हुआ है जो कलाई पर पहनते ही गर्व और साहस से दिल भर  जाता है |

उपसंहार –

 रक्षाबंधन भारत में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाने वाला पर्व है | यह हिन्दुओ का एक विशेष त्योहार माना जाता है | इस दिन सभी भाई अपने बहनो के लिए अत्यधिक प्यार और सुरक्षा पर बल है |

परन्तु सिर्फ एक दिन ही हम सभी लोग स्त्रियों को विशेष रूप से सुरक्षा प्रदान करने को लेकर चिंतित और बल का प्रयोग करने में सक्षम मानते है | भारत में प्रत्येक दिन स्त्रियों को ठेस पहुँचाया जाता है , गली ,चौराहो , स्कूलो , कॉलेजो हर जगह स्त्रियों के सम्मान को ठेस पहुँचाया जाता है |

क्यों सर हम रक्षाबंधन के दिन ही स्त्रियों के मान – सम्मान और आदर के बारे में चिंतन करते है ? क्यों  हम सिर्फ  रक्षाबंधन के दिन ही स्त्रियों को सुरक्षा देने का कसम खाकर उसी दिन उस कसम को तोर देते है ? यदि हमारे देश में  रक्षाबंधन के इस  पवित्र पर्व के अर्थ को सही मायने में समझ ले तो हम हर वक्त स्त्रियों को सम्मान और सुरक्षा प्रदान करेंगे और देवी माने जाने वाली स्त्रियों को हर वक्त सम्मान देंगे |

हमारे देश में गरीबी एक बड़ी महामारी के रूप में फैली हुयी है हम लोग गरीबी से परेशान तो रहते ही है और ऊपर दहेज़ – प्रथा तो एकदम गरीबो का जीना बिलकुल ही हराम कर दिया है और जब लड़की अपने ससुराल जाती है तो  उन्हें दहेज़ के लिए प्रताड़ित किया जाता है |

अगर हम रक्षाबंधन के इस पविी त्र पर्व को समझ पाएंगे तो हम स्त्रियों के साथ हो रहे बर्बरता और नरसंघार का उन्मूलन कर देंगे लेकिन हम सिर्फ रक्षाबंधन के दिन ही महिलाओ और स्त्रियों की सामान का ढाढ़स करते है | भारत देश की संस्कृति पूरी दुनिया का ध्यान अपने ओर आकृष्ट करते हुए आयी है परन्तु थोड़ी गैरसामजिक तत्वों तथा नियमो के कारण हम अपनी गरिमा को धूमिल कर रहे है |

हमे आज अपने देश की स्त्रियों को सिर्फ रक्षाबंधन के त्यौहार के दिन ही नहीं बल्कि प्रत्येक दिन उन्हें सामन और आदर देना होगा जिससे हम रानी लक्ष्मी बाई जैसी वीरांगनाओं को जन्म दें पाएंगे जिससे हमारा देश धन्य हो जायेगा |   

रक्षाबंधन पर 10 लाइन –

  1. रक्षाबंधन हिन्दुओ का महत्वपूर्ण त्यौहार है |
  2. रक्षाबंधन भारतीय पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष श्रवण ( सावन )के माह में मनाया जाता है |
  3. रक्षाबंधन में ‘रक्षा ‘ का अर्थ सुरक्षा तथा ‘बंधन ‘ का बाध्य से है |
  4. रक्षाबंधन भाई – बहन के प्रेम का प्रसिद्ध त्योहार है |
  5. यह भारत देश में बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है |
  6. रक्षाबंधन कई नाम – श्रावणी , नारियल पूर्णिमा , उपक्रमण आदि से भारत में जाना जाता है |
  7. इस पर्व के दौरान भारत के कुछ हिस्सों में समुन्द्र के तट पर नारियल का भेंट चढ़ाकर स्नान कर इस पर्व का आनंद उठाते है |
  8. इस पर्व में एक भाई अपने बहन के लिए सुरक्षा और बहन अपने भाई के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते है |
  9. इस पर्व में सभी स्त्रियाँ अपने भाइयो के लिए विभिन्न प्रकार के राखियों का बंदोबश्त करती है |
  10. रक्षाबंधन के इस पर्व को सभी लोग बड़े ही धूमधाम से मनाते है |

आपकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए हम आपके द्वारा पूछे गए कुछ प्रश्नो के उत्तर निचे अंकित कर रहे है –

प्रश्न 1 – रक्षाबंधन क्या है?

उत्तर – रक्षाबंधन दो शब्द  ‘ रक्षा ‘ और  ‘ बंधन ‘ से मिलकर बना हुआ है | जिसमे रक्षा का अर्थ – सुरक्षा और बंधन का अर्थ – बाध्य होता है | अर्थात इसका अर्थ इसके नाम में ही छिपा हुआ है | जब एक भाई अपने बहन की रक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करता है उस व्यापक और पवित्र दिन को ही रक्षाबंधन के नाम से जाना जाता है |

प्रश्न 2. – रक्षाबंधन कब मनाया जाता है?

उत्तर – रक्षाबंधन प्रत्येक वर्ष भारतीय पंचाँग के अनुसार श्रावण ( सावन ) की पूर्णिमा को मनाया जाता है |

प्रश्न 3. रक्षाबंधन को और किन नाम से जाना जाता है?

उत्तर – भारत के विभिन्न क्षेत्रों में रक्षाबंधन के इस पवित्र पर्व को विभिन्न नाम – नारियल पूर्णिमा या श्रावणी , अवनि अवित्तम ,  उपक्रमण आदि से जाना जाता है |

प्रश्न 4.भारत के अलावा रक्षाबंधन किन-किन देशों में मनाया जाता है?

उत्तर – जिन देशो में भारतीय मूल के लोग निवास करते है वहाँ राखी के इस पवित्र पर्व को मनाया जाता है जैसे – नेपाल , ब्रिटेन , अमेरिका , ऑस्ट्रेलिया , कनाडा , दुबई , क़तर , सऊदी अरब और अन्य देशो  में भी मनाया जाता है |

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