Swami Vivekananda In Hindi For Students

swami vivekananda in hindi

swami vivekananda in hindi – हिंदी में स्वामी विवेकानंद

आज हमलोग स्वामी विवेकानंद पर हिंदी निबंध 2021 पढ़ेंगे , जो परीक्षा की दृष्टिकोण से कक्षा 6 ,7 , 8 , 9 ….. सभी वर्ग के बच्चो और क्षात्रो के लिए अत्यधिक उपयोगी होगी | तो चलिए सीखते है स्वामी विवेकानंद पर हिंदी निबंध 2021 ……

swami vivekananda in hindi – हिंदी में स्वामी विवेकानंद

भूमिका –

 जिस समय भारतीय मातृभूमि को हिन् भावना से देखा जा रहा था , हमे विरोधी देशो ने तुच्छ समझने की भूल कर रहे थे हमे हमारी औकात दिखा रहे थे उस समय हमारे देश के एक वीर सपूत ने दुनिया और विरोधियो को अमेरिका के एक भासन समारोह में भारत की मिटटी की ताकत का लोहा मनवा दिया दुश्मनो के आशाओं  को निराशा में बदल दिया और उन्हें स्वयं में झुकने को मजबूर कर दिया , वे कोई और नहीं बल्कि हमारे  देश के एक छरहरे  युवा शिक्षाविद , संत , आचार्य स्वामी विवेकानंद ही थे |

अपनी शिक्षा , चिंतन व समझ कौशल से इस सिमा तक लोगो को उनकी सोंच व नजरिये को आघात किया के अँगरेज़ गोरे इस युवा से तो नज़रे मिलाने का भी सामर्थ्य खो दिये |भारत की  सभ्यता , संस्कृति को इस कदर दुनिया के सामने दर्पण की तरह पेश किया के हम भारतीयों का सर गर्व से ऊँचा हो गया |

 

एक विचार लें और इसे ही अपनी जिंदगी का एकमात्र विचार बना लें। इसी विचार के बारे में सोचे,

सपना देखे और इसी विचार पर जिएं। आपके मस्तिष्क , दिमाग और रगों में यही एक विचार भर जाए

 यही सफलता का रास्ता है। इसी तरह से बड़े बड़े आध्यात्मिक धर्म पुरुष बनते हैं।  “

….. स्वामी विवेकानंद , महान विचारक 

 

swami vivekananda in hindi

 

वे एक महान विचारक तथा सच्चे देशभक्त थे जिन्होंने सांसारिक सुखो का त्याग कर एक संत के रूप में जीवन निर्वाह करने का फैसला किया | अपने ज्ञान व कौशल के वजस से दुनिया के सभी सांसारिक सुखो का उपभोग कर सकता था लेकिन उन्होंने इसका उपभोग करने के बजाय अपने देश की गरिम को ध्यान में रखते हुए एक संत का जीवन जीने के मार्ग को ग्रहण कर लिया |

जन्म और शिक्षा –

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी सन 1863 को कलकता के एक कायस्थ्य परिवार में हुआ था | उनके बचपन का नाम वीरेश्वर था | बाद में उनका नाम नरेन्द्रनाथ दत्त हो गया | उनके पिता का नाम विश्वनाथ दत्त था , जो कलकत्ता हाईकोर्ट के एक लोकप्रिय वकील थे | इनके दादा भी एक बड़े विद्वान थे |

swami vivekananda in hindi – हिंदी में स्वामी विवेकानंद

उनकी माता का नाम भुवनेश्वरी देवी जो धार्मिक विचारधाओं पर चलने वाली महिला थी | उनकी माता का अधिकतर समय भगवान्  शिव की पूजा अर्चना में ही निकल जाता था | माता – पिता दोनों की धार्मिक आस्थाओ को देखते हुए अपनी विचारधारा को भी इनसे अलग नहीं कर सके और अंतया वे 25 वर्ष  की आयु में ही धार्मिक विचारधारों की गहरी समझ के लिए घर का त्याग कर दिया गया |

स्कूल की शिक्षा प्राप्त करने के लिए 8 वर्ष की आयु में उनका नामांकन सन 1871 में  ईश्वर चंद्र विद्यासागर मेट्रोपोलियन संस्थान में हो गया | सन 1879 ईo में वे पहले ऐसे क्षात्र थे जिन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज प्रवेश परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की |सन 1881 में इन्होंने ललित कला की परीक्षा उत्तीर्ण की, और 1884 में कला स्नातक की डिग्री पूरी कर ली|

अपनी स्कूली शिक्षा के साथ – साथ वे विभिन्न धार्मिक किताबे – रामायण , महाभारत , गीता , उपनिषद इत्यादि का भी अध्यन करने में अत्यधिक रूचि लेते थे | विद्यालयी शिक्षा के दौरान वे इतिहास , कला , सामजिक विज्ञानं , साहित्य  इत्यादि विषयो को अत्यधिक गहनता के साथ पठन  करते थे |उन्होने संस्कृत के ग्रंथो के अध्ययन के साथ बंगाली साहित्य को भी पड़ने का प्रयाश किया | वे पश्चिमी सभ्यता के दार्शनिको के बारे में भी अध्यन करें का प्रयाश किया |

 विलियम हेस्टी (महासभा संस्था के प्रिंसिपल) ने उनके बारे में इस सिमा तक कहा –  ” नरेंद्र वास्तव में एक जीनियस है। मैंने काफी विस्तृत और बड़े इलाकों में यात्रा की है लेकिन उनकी जैसी प्रतिभा वाला का एक भी बालक कहीं नहीं देखा यहाँ तक की जर्मन विश्वविद्यालयों के दार्शनिक छात्रों में भी नहीं ” | उनके विलक्षण स्मिर्ति के कारण उन्हें श्रुतिधर ( विलक्षण स्मिर्ति वाला व्यक्ति ) की भी उपाधि से भी सम्मानित किया गया |

स्वामी विवेकानंद के बचपन के दिन –

 वे बचपन के दिनों में दोस्तों के साथ खेल – कूद करते हुए समय व्यतीत करते थे | वे बचपन में नटखट होने के साथ अत्यंत कुशाग्र बुद्धि के थे | वे बच्चो के साथ मिलकर खूब शरारत किया करते थे और अवसर मिलते ही अपने अध्यापको के साथ भी शरारत करने से नहीं चूकते थे | 

उनकी माता की धार्मिक प्रविर्ती होने  के कारण प्रायः ही धार्मिक ग्रन्थ – महाभारत , रामायण, वेद आदि का वाचन करने में लगी रहती थी | इसलिये इनके घर कथावाचकों का आना लगा रहता था | परिवार का धार्मिक व आध्यात्मिक कार्यो में अत्यधिक रूचि को देखते हुए बालक नरेन्द्रदत्त की भी रूचि इस दिशा में बढ़ने लगी |

बालक नरेन्द्रदत्त कभी – कभी ऐसे प्रश्न पूछ बैठते थे की माता – पिता को उनक उत्तर देने के लिए  पंडितो को निमंत्रण देना परता  था परन्तु इसके पश्चात भी उन्हें सनतोषजनक उत्तर नहीं मिल  पाता था | बचपन से ही उन्हें अध्यात्म के प्रति काफी रूचि गहराती चली गयी थी | वे धार्मिक आस्थाओ को भली – भांति समझना चाहते थे तथा मानवीय कर्तव्यों को सुदृढ़ करने का प्रयाश करते थे | 

स्वामी विवेकानंद की मृत्यु – 

4 जुलाई 1902 ईo को स्वामी विवेकानंद अपने दिनचर्या के सभी कार्यो से संपन्न होने के बाद भगवन कि  साधना में लिप्त थे और उसी अवस्था में दुनिया को अलविदा कह गए |  मृत्यु के अंतिम दिन स्वामी विवेकानंद ने शुक्ल यजुर्वेद की व्याख्या करते हुए  से कहा – ” अपने शिष्यों से ये बाते कह रहे थे – ” एक और विवेकानन्द चाहिये, यह समझने के लिये कि इस विवेकानन्द ने अब तक क्या किया है ” |

स्वामी विवेकानंद के गुरु श्री राम कृष्ण परमहंस की बेलूर के गंगा तट के एक किनारे पर आज से 16 वर्ष पूर्व अंतिम संस्कार सम्पन किया गया था वही दूसरी और उनके महान यशस्वी शिष्य स्वामी विवेकानंद का भी चन्दन की चिता पर अंतिम- संस्कार संपन्न  किया गया |

उनके शिष्यों ने समय साथ अपने गुरु स्वामी विवेकानंद और महान संत रामकृष्ण परमहंस के स्मारक बनाकर उसकी स्मिर्ति को जग – जाहिर कर दिया तथा स्वामी विवेकानंद के नाम पर सैकड़ो केंद्र स्थापित कर दिया जिससे लोगो को उनकी जीवन – यात्रा से सिख मिले तथा सच्चाई के मार्क को अपनाया जा सके | आज पुरे विश्व में महान संत , विचारक , धर्मगुरु स्वामी विवेकानंद के जीवन को अपनाकर सफलता के मार्ग को प्राप्त कर रहे है | 

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